sindhu ghati ki sabhyata

sindhu ghati ki sabhyata Part 2

Popular Study में आपको प्राचीन भारत के इतिहास के बहतरीन नोट्स उपलब्ध करवाएं जा रहे है जो आपके कठिन से कठिन प्रश्नों को आसान करने का दावा करता है| इसी कड़ी में आज आपको sindhu ghati ki sabhyata के नोट्स दिए जा रहे है | अपने एग्रजाम की तैयारी के लिये बने रहे Popular Study के साथ |

हड़प्पा सभ्यता

★ मोहनजोदड़ो 

  • इस सभ्यता  का प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो है  यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में आया हुआ है । 
  • यह सिंधु नदी के दाहिने तट पर स्थित है ।
  • यह क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से भी सर्वाधिक बड़ा शहर का है।
  • हिंदी भाषा में मोहनजोदड़ो का अर्थ होता है-  मुर्दों का टीला
  •  इसकी खोज 1922 मे राखलदास बनर्जी ने की थी ।
  • इस शहर पर एक  स्तूप  मिला है इस स्तूप का  निर्माण कुषाण काल में किया गया था ।
  • शहर को दो भागों में बांटा गया था । पहला दुर्ग तथा दूसरा निचला शहर 

दुर्ग पर क्या क्या बना हुआ था ?

  • स्नानागार बना हुआ है इस स्नानागार का फर्श पक्की ईंटों से बना हुआ है । इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठान के समय स्नान के लिए होता था ।
  • अन्नागार यह शहर की सबसे बड़ी इमारत है ।
  •  सभा भवन यहां सभाएं हुआ करती थी और  27 × 27  मीटर वर्गाकार है।
  • पुरोहित आवास स्नानागार के उत्तर पूर्व में पुरोहित आवास मिला है

कला व शिल्प 

हड़प्पा शहर  में पत्थर की पुजारी की मूर्ति तथा तांबे की मानव मूर्ति मिली है ।  मोहंजोदरो से कांसे की नर्तकी की मूर्ति मिली है ।बनावली से मिट्टी का हल मिला है । कालीबंगा से कांसे का बैल मिला है ।

 मृणमूर्ति

 मूर्ति चिकोटी पद्धति से निर्मित की गई थी जो अधिकतर  सेलकड़ी से बनाई गई है । मोहंजोदरो से घोड़े की मृण्मूर्ति मिली है 

मनके

 इसके सबूत चन्हूदड़ों से मिले हैं यहां मनके बनाने का कारखाना था । बेलनाकार मनके बनाए जाते थे ।

 मृदभांड 

काले और लाल मृदभांड सर्वाधिक प्रचलित थे लोथल के मृदभाण्ड पर पंचतंत्र जैसी कहानियां उत्कीर्ण की जाती थी ।

मुहर 

यह कला एवं स्थापत्य कला का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है ।

मोहरा का आकार चौकोर वर्गाकार और लोथल से बेलनाकार मुद्रा प्राप्त हुए है । मोहनजोदड़ो से अधिकतर मुहरों पर बैल उत्कीर्ण किया गया है।

नोट:- हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बीच की दूरी 482 किलोमीटर है पिग्गट महोदय ने इन दोनों शहरों को सिंधु सभ्यता की  जुड़वा राजधानी कहां है ।

sindhu ghati ki sabhyata
sindhu ghati ki sabhyata

★ चन्हूदड़ों

  •  इसकी खोज 1931 में एस.जी मजूमदार ने की थी । 
  • पर कोई भी दुर्गीकरण का प्रमाण नहीं मिला है । 
  • यहाँ मनके बनाने का कारखाना मिला है ।
  • यहाँ एक सिक्का मिला जिस पर घड़ियाल और मछलियां उत्कीर्ण की गई है ।
  • यहाँ बिल्ली और कुत्ते के पंजे के निशान मिले हैं ।
  •  यहाँ पर वक्राकार ईटो का प्रयोग किया जाता था ।
  •  यहाँ पर लिपस्टिक कंघा  उस्तरा  काजल  आदि  के प्रमाण मिले हैं ।
  • यहाँ मिट्टी की पक्की हुई पाइपनुमा नालियों का प्रयोग होता था।

     ★ लोथल 

  • इसे लघुहड़प्पा लघुमोहनजोदड़ो भी कहते है ।
  • इसकी खोज 1956 में एसआर राव ने की ।
  •  यह गुजरात राज्य के अमदाबाद जिले के भोगवा नदी के किनारे पर स्थित है।
  • यहां पर एक गोदिवाडा मिला है जहाँ  जहाज  ठहरते थे। 
  • यहाँ जल प्रबंधन की उचित व्यवस्था थी ।
  •  यहाँ  से अग्निकुंड मिले है ।
  •  मनके का कारखाना था ।
  • यहाँ से रंगाई कुंड मिला है ।
  • यहाँ से अग्निकुंड मिले हैं ।
  •  आटा पीसने की पत्थर की चक्की के सबूत मिली है ।
  • चावल के साक्ष्य मिले हैं ।
  • मिट्टी के बने नावो के साक्ष्य मिले है ।

★ कालीबंगा

  •  कालीबंगा की  खोज 1951 में अमलानंद घोष ने की की थी ।
  • कालीबंगा का अर्थ होता है काले रंग की चूड़ियां ।
  • ये राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले में स्थित है ।
  • यहाँ से जूते हुए खेत के साक्ष्य मिले है।
  • यहाँ दोनों शहर के दोनों ही भाग (पूर्वी और पश्चिमी) को अलग-अलग दुर्गीकृत किया गया है 
  •  यहाँ पर कच्ची ईंटों का प्रयोग किया गया है।
  • यहाँ पर अग्निकुंड और वेदिकाऍ मिली है।
  • यहाँ पर भूकंप के प्रमाण भी मिले हैं।
  • यहां लिंग पूजा के साक्ष्य भी मिले हैं।

★  बनावली 

  • इसकी खोज आर.एस. बिष्ट ने 1974 में की थी ।
  •  यहाँ मिट्टी का बना हल मिला है ।
  •  यहाँ उत्तम किस्म की जौ के सबूत मिले है ।
  • यहाँ जल निकासी का अभाव है ।
  • यहाँ संभवतः मंदिर होने के सबूत मिले है ।

★   धोलावीरा

  •  इसकी खोज जे.पी. जोशी ने 1967 में की थी ।
  • धोलावीरा का अर्थ होता है सफेद कुआं।
  • यहाँ टीले पर एक पुराना कुआं मिला है।
  • हडप्पा सभ्यता के   सभी शहरों को दो भागों में बांटा गया है परंतु धौलावीरा एकमात्र ऐसा शहर है जिसे तीन भागों में बांटा गया है- किला मध्य और निचला शहर ।
  •  यहाँ स्टेडियम के साक्ष्य मिले हैं ।
  • यहाँ अभिलेख मिला हैं ।
  • यहाँ नेवले की पत्थर की मूर्ति मिली है।
  • यहाँ विशाल जलाशय के सबूत मिले है।

   ★  महत्वपूर्ण तथ्य

  1.  दास प्रथा – सिंधु सभ्यता से दास प्रथा के प्रमाण मिले हैं ।
  1. मातृ प्रधान – सिंधु सभ्यता मातृप्रधान है   क्योंकि यहाँ नारी मूर्तियां अधिक मिली है ।
  1.  सती प्रथा – यहाँ से सती प्रथा के सबूत मिले है । लोथल से तीन युगल शवाधान  कालीबंगा से एक युगल शवाधान मिला है ।
  1. सिंधु सभ्यता कि लोग शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही प्रकार के थे ।
  1. आभूषण –  सिंधु सभ्यता के लोग आभूषण के शौकीन थे । सोने चांदी माणिक्य मिट्टी शिप तथा हाथी दांत के आभूषणों का उपयोग किया जाता था । इसके अलावा यहां पर तांबे का दर्पण और हाथी दांत की कंघी और सुई भी मिली है ।
  1. जीवन निर्वाह –  सिंधु सभ्यता  के लोग कृषि पशुपालन शिल्पकारी तथा  व्यापार से अपने जीवन का निर्वाह करते थे ।
  1.  व्यापार –  हड़प्पा सभ्यता के लोग देशी और वेदेशी व्यापार करते थे । यहाँ के लोग समकालीन सभ्यता ज्यादातर मेसोपोटामिया से व्यापार करते थे । 
  1. निर्यात – हड़प्पा सभ्यता के लोग सूती वस्त्र व हाथी दांत की वस्तुओं का निर्यात किया करते थे ।
  1. आयात राजस्थान की आहड़ सभ्यता से तांबा कोलार कर्नाटक से सोना और बदशखा अफगानिस्तान से चांदी टिन और लाजवर्त का आयात किया जाता था ।
  1.  फ़सल – हड़प्पा सभ्यता के लोगों को कुल 9 फसलों का ज्ञान था – गेहूं जौ कपास खजूर तरबूज राई सरसों तथा तिल । लोथल से चावल के प्रमाण मिले रंगपुर से धान की भूसी के प्रमाण मिले तथा मेहरगढ़ से कपास के प्रमाण मिले हैं।
  1.  पशु – हड़प्पा सभ्यता में लोगों को गाय बैल भैंस बकरी भेड़ कुत्ते बिल्ली हाथी आदि  से परिचित थे । सुरकोटड़ा गुजरात से घोड़े की हस्तियों के प्रमाण मिले और राणागुंडई  से घोड़े के दांत के प्रमाण मिले हैं । सबसे प्रिय पशु कूबड़ वाला सांड था । ऊंट घोड़ा और गाय मुद्रा पर  उत्कीर्ण नहीं किए गए थे ।
  1.  उद्योग –  यहाँ के वस्त्र उद्योग में लाल रंग कपड़े का निर्माण किया जाता था । मिट्टी के बर्तन पर सूती कपड़े की छाप दी जाती थी । मोहंजोदरो से  पुरोहित की  मूर्ति मिली है जिस पर तिपतिया अलंकरण किया गया था । इसमें शाल ओढे जिस पर कढ़ाई की गई थी एक पुरोहित को दिखाया  गया है ।
  1. मिट्टी के बर्तन – यहाँ के लोग मिट्टी के बर्तनों का निर्माण करते थे । यहाँ से ईट भट्टों का प्रमाण मिला है ।
  1.  मापन – फुट और क्यूबिक में मापन किया जाता था । बाट घनाकार थे । बाट  के प्रकार निचले स्तर पर द्विविभाजन प्रणाली और ऊपरी स्तर पर दशमलव प्रणाली प्रचलित थी ।
  1. हथियार – हडप्पा सभ्यता के लोग कुल्हाड़ी आरा खुरचा छुरी बरछा आदि हथियारों का प्रयोग किया जाता था। 
  1. मूर्तियां :- यहाँ धातु मिट्टी और पत्थर की मूर्तियां बनाई जाती थी । लुप्त मोम विधि का प्रयोग किया जाता था । मिट्टी की मानव की  मूर्ति को ठोष् तथा पशुओं की मूर्ति खोखली  बनाई जाती थी  ।  चन्हूदड़ों से  इक्का गाड़ी कांसे की बैलगाड़ी कहां  की बैलगाड़ी मिली है । दैमाबाद से काँसे का रथ मिला है ।
  1. मुद्राएं – सर्वाधिक एक श्रृंगी पशु वाली मुद्रा मिली है ।मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुहर पशुपति शिव का भी अंकन किया गया है ।
  1. यहां के लोग शतरंज का खेल खेलते थे।
  1. धार्मिक जीवन –  सिंधु घाटी सभ्यता के लोग  मातृ देवी की उपासना करते थे। पशुपति शिव को मानते थे  तथा प्रकृति की पूजा करते थे। अतः इन तिन  तरह से वे अपना धार्मिक जीवन  व्यतीत करते थे । 
  1. शवाधान –  व्यक्ति के मरने के बाद उसका तीन तरफ से शवाधान किया जाता था । दाहद्वारा आंशिक द्वारा आशिंक शवाधान  और पूंर्ण शवाधान। कालीबंगा में तीनों के प्रमाण मिले है  हड़प्पा में विदेशी शवाधान के सबूत मिले । रोपड़ में मालिक के साथ कुत्ते को दफ़नाने के सबूत मिले है ।
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★ सिंधु घाटी सभ्यता पतन

 हड़प्पा सभ्यता के पतन के कई मत है । अलग-अलग इतिहासकारों ने अलग-अलग मत दिए है ।

  •  पहला मत है आर्यों का आक्रमण ऐसा माना जाता है कि हड़प्पा सभ्यता सभ्यता पर आर्यों का आक्रमण हुआ था । इसकी पुष्टि मोहनजोदड़ो से प्राप्त 38 नर कंकालो  से की जाती है ।
  • परिस्थितिकी विक्षोभ फेयर सर्विस ने अपनी पुस्तक ‘द रूट ऑफ इंसेंट इंडिया’  में हड़प्पा सभ्यता के पतन का कारण पारिस्थितिकी विक्षोभ को मन है ।
  •  जलवायु परिवर्तन ओरेन स्टाइन के अनुसार जलवायु परिवर्तन से सिंधु घाटी सभ्यता का पतन हुआ ।
  •  बाढ़ मैंके,लैंब्रीक, राइक्स डेल्स आदि विद्वानों का मानना है कि इस सभ्यता का पतन बाढ़ से हुआ । ये सर्वाधिक लोगों द्वारा मान्य तर्क  है ।  मोहनजोदड़ो से 7 स्तर के बाढ़ के सबूत भी मिले हैं ।
  • भूकंप कुछ  विद्वानों का मानना है कि सिंधु घाटी सभ्यता का विनाश भूकंप के कारण हुआ है । कालीबंगा में भूकंप के साक्ष्य मिले है । 

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